नई दिल्ली। सनातन धर्म में महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर शिव पूजन करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।
महादेव का स्वरूप बेहद अलौकिक और रहस्यमयी है। अन्य देवता स्वर्ण आभूषण समेत आदि चीजें धारण करते हैं। वहीं, भगवान शिव भस्म, रुद्राक्ष और सांपों को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान शिव गले में क्यों धारण करते हैं सांप। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए जानते हैं इसकी वजह के बारे में।
महादेव ने इसलिए धारण किया सांप
पौराणिक कथा के अनुसार, नागों के राजा वासुकी को शिव जी अपने गले में धारण करते हैं। वासुकी भगवान शिव के अनंत भक्त थे। वासुकी की इच्छा थी कि वह हमेशा महादेव के समीप रहे। समुद्र मंथन के समय महादेव ने जब’ हलाहल’ विष पिया था। वासुकी ने भी उस विष के प्रभाव सहने में महादेव ने मदद की थी। शिव जी वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें हमेशा के लिए अपने गले ने आभूषण के रूप में धारण करने का वरदान दिया। तभी से वासुकी अमर हो गए। इसलिए भगवान शिव अपने गले में सांप को धारण करते हैं।
किस पुराण में है वर्णन?
भगवान शिव और सांप के संबंध का वर्णन शिव पुराण, स्कंद पुराण में किया गया है।
कालसर्प दोष और पितृ दोष से छुटकारा
भगवान शिव के संग सांप की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो ऐसे में सोमवार या महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से राहु-केतु शांत होते हैं और कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है। साथ ही भगवान शिव प्रसन्न होकर जातक की सभी मुरादें पूरी करते हैं।
भरे रहेंगे धन के भंडार
अगर आप धन-धान्य में वृद्धि चाहते हैं, तो भगवान शिव के संग सांपों की पूजा-अर्चना जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से रुका हुआ पैसा वापस मितला है और धन के भण्डार भरे रहते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

