नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिक परवीन शेख को लुप्तप्राय ‘इंडियन स्किमर’ पक्षी के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित Whitley Award प्रदान किया गया है। यह सम्मान Whitley Fund for Nature द्वारा दिया जाता है, जिसे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में “ग्रीन ऑस्कर” के रूप में भी जाना जाता है।
यह पुरस्कार Royal Geographical Society में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया, जहां राजकुमारी ऐनी ने उन्हें सम्मानित किया। इस उपलब्धि ने भारत में जमीनी स्तर पर हो रहे संरक्षण कार्यों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
‘इंडियन स्किमर’ एक दुर्लभ और लुप्तप्राय नदी पक्षी है, जिसकी पहचान उसकी नारंगी चोंच और पानी की सतह से भोजन पकड़ने की अनोखी शैली से होती है। दुनिया भर में इसकी लगभग 90 प्रतिशत आबादी भारत में पाई जाती है और यह मुख्य रूप से नदी के रेतीले टापुओं पर घोंसले बनाता है।
परवीन शेख द्वारा गंगा बेसिन में अपनाया गया समुदाय-आधारित ‘गार्जियन मॉडल’ इस सफलता की कुंजी रहा है। इसके तहत स्थानीय ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर घोंसलों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई, जिससे घोंसलों की सुरक्षा दर 14% से बढ़कर 27% तक पहुंची और पक्षियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इस परियोजना को Bombay Natural History Society (BNHS) का सहयोग प्राप्त है। साथ ही Uttar Pradesh Government तथा Ram Pratap Singh (संस्थापक, Chambal Safari एवं ISN) द्वारा वर्ष 2015 से इस संरक्षण कार्य को आर्थिक और लॉजिस्टिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिसने इस पहल को जमीन पर सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब व्हिटली अवॉर्ड से मिली सहायता के जरिए इस परियोजना का विस्तार प्रयागराज तक किया जाएगा। हालांकि, यहां तीर्थयात्रा की भीड़, प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण संरक्षण कार्यों के सामने नई चुनौतियां भी मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल एक दुर्लभ पक्षी के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार, स्थानीय समुदाय और निजी सहयोग से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दी जा सकती है।

