Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर बन रहे हैं दिव्य ज्योतिषीय योग, जानें रुद्राभिषेक का महत्व और शुभ मुहूर्त

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Published on: 13-02-2026

ज्योतिष डेस्क आगरा : महाशिवरात्रि का पर्व केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आचार्य अभिषेक वशिष्ठ (पुरोहित जी) के अनुसार, इस दिन ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जो मानव मन और आत्मा को सीधे परमात्मा से जोड़ने में सहायक होती है।

महाशिवरात्रि का काल निर्धारण

​शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। शिव पुराण और लिंग पुराण में वर्णित है कि जब चतुर्दशी तिथि रात्रि के समय व्याप्त हो, तब शिव पूजन का सर्वोत्तम फल प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि के प्रमुख ज्योतिषीय योग

1. चतुर्दशी तिथि का विशेष प्रभाव

चतुर्दशी के स्वामी स्वयं भगवान शिव हैं। इस दिन चंद्रमा अपनी क्षीण अवस्था में होता है। ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मन’ का कारक माना गया है। चंद्रमा का कमजोर होना मन के शांत और अंतर्मुखी होने का संकेत है, जो आध्यात्मिक साधना के लिए सबसे उपयुक्त समय है।

2. चंद्रमा और चंद्रशेखर का संबंध

भगवान शिव को “चंद्रशेखर” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। महाशिवरात्रि पर चंद्रमा प्रायः कुंभ या मीन राशि के समीप होता है, जो त्याग और आध्यात्मिक जागरण का सूचक है। इस रात्रि जप-तप करने से मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।

3. निशीथ काल पूजा का रहस्य

रात्रि का मध्य भाग यानी निशीथ काल सूक्ष्म ऊर्जा के सक्रिय होने का समय है। ज्योतिष के अनुसार, यह काल तमोगुण के शमन और आत्मजागरण का प्रतीक माना गया है।

उपवास और ग्रह शांति के उपाय

​महाशिवरात्रि पर किए गए उपायों से कुंडली के कई दोष शांत होते हैं:

  • चंद्र दोष: शिव अभिषेक से मानसिक शांति मिलती है और चंद्र दोष दूर होता है।
  • राहु-केतु शांति: भगवान शिव की पूजा से छाया ग्रहों की प्रतिकूलता कम होती है।
  • शनि की साढ़ेसाती: शनि की साढ़ेसाती या ढैया से पीड़ित जातकों के लिए यह दिन विशेष फलदायी है।
  • रुद्राभिषेक: वेद मंत्रों से किया गया अभिषेक ग्रहों की अशुभता को दूर कर जीवन में शुभता लाता है।

महाशिवरात्रि पर क्या करें? (धर्म और ज्योतिष सम्मत)

  • चार प्रहर की पूजा: संभव हो तो रात्रि के चारों प्रहर में शिव अर्चना करें।
  • विशेष अर्पण: शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं।
  • मंत्र जप: “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जप करें।
  • रात्रि जागरण: इस रात्रि सोने के बजाय जागरण कर साधना करना सहस्र गुना फल देता है।
  • दान-पुण्य: पूजन के पश्चात गरीबों को अन्न या वस्त्र दान करें।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि ग्रहों, मन और आत्मा के संतुलन का दिव्य अवसर है। आचार्य अभिषेक वशिष्ठ के अनुसार, इस दिन किया गया प्रयास जातक को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है और दांपत्य सुख, स्वास्थ्य व आयु में वृद्धि करता है।

लेखक परिचय:

आचार्य अभिषेक वशिष्ठ (पुरोहित जी)

संस्थापक: अथर्ववेद ज्योतिष अनुसंधान केंद्र

संपर्क: +91 6398072165, 8279623938

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