होली 2026: रंग, ऊर्जा और ग्रहों का दिव्य समन्वय; जानें क्यों इस बार 4 मार्च को खेली जाएगी होली

Follow

Published on: 27-02-2026

चम्बल टाइम्स न्यूज़ डेस्क: होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा में यह ऋतु परिवर्तन, ग्रह ऊर्जा और आध्यात्मिक शुद्धि का महापर्व है। इस वर्ष 2026 में होली का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह उत्सव हमें बाहरी रंगों के साथ-साथ अंतरात्मा को भी जागृत करने का संदेश देता है।

100 साल बाद होली पर चंद्र ग्रहण का साया

​इस वर्ष होली पर एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटित हो रही है। 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। ग्रहण के सूतक काल और शुद्धिकरण के कारण अधिकांश पंचांगों के अनुसार रंगों वाली होली (धुलेंडी) 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।

होलिका दहन और ग्रह शांति

​पौराणिक कथा के अनुसार प्रह्लाद की भक्ति और होलिका दहन की घटना हमें सिखाती है कि सत्य की अग्नि में अहंकार भस्म हो जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस रात्रि अग्नि में जौ, तिल और नारियल अर्पित करने से राहु, केतु और शनि से संबंधित कष्टों में शांति मिलती है। विशेषकर इस बार मंगल और राहु की युति से बन रहे ‘अंगारक योग’ के प्रभाव को कम करने के लिए होलिका पूजन अत्यंत फलदायी रहेगा।

रंगों का ज्योतिषीय पैराग्राफ: किस ग्रह के लिए कौन सा रंग?

​ज्योतिष शास्त्र में रंगों का ग्रहों से गहरा संबंध माना गया है। होली पर इन रंगों का प्रयोग केवल आनंद का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे अवचेतन स्तर पर ग्रहों की सकारात्मक तरंगों को सक्रिय करने का एक सशक्त माध्यम भी है। जैसे लाल रंग मंगल का प्रतीक है जो हमारे भीतर साहस और अदम्य ऊर्जा का संचार करता है, वहीं पीला रंग देवगुरु बृहस्पति से संबंधित है जो जीवन में ज्ञान और समृद्धि का कारक बनता है। इसी प्रकार हरा रंग बुध ग्रह की शक्ति को बढ़ाकर हमारी बुद्धि को प्रखर करता है, जबकि नीला रंग न्याय के देवता शनि का द्योतक है जो हमें कर्म प्रधान बनने की प्रेरणा देता है।

ऋतु परिवर्तन और आपका स्वास्थ्य

​होली के समय शीत ऋतु समाप्त होकर वसंत का आगमन होता है। आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों मानते हैं कि इस काल में शरीर में कफ का प्रभाव बढ़ता है। इसलिए होली पर गुझिया और संतुलित खान-पान की परंपरा है, जिससे शरीर नई ऋतु के अनुरूप ढल सके। इस दौरान दान-पुण्य करना भी बेहद शुभ माना गया है।

विशेष ज्योतिषीय मार्गदर्शन

इस पावन अवसर पर यदि विधिपूर्वक होलिका दहन पूजन या व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार विशेष उपाय किए जाएँ, तो वर्ष भर सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी उद्देश्य से अथर्ववेद ज्योतिष अनुसंधान केंद्र द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है।

संपर्क एवं परामर्श हेतु:

  • आचार्य अभिषेक वशिष्ठ (पुरोहित जी)
  • संस्थापक: अथर्ववेद ज्योतिष अनुसंधान केंद्र
  • ​ संपर्क: 6398072165, 8279623938

"इस प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई हर खबर स्वतंत्र क्रिएटर्स द्वारा साझा की गई है। इन खबरों की सत्यता और विचारों की पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रिएटर की है। प्लेटफॉर्म का इन खबरों से कोई सीधा संबंध या कानूनी जिम्मेदारी नहीं है।"

चंबल की मिट्टी से जुड़ी खबरों के साथ-साथ दुनिया भर के अपडेट्स के लिए Chambal Times आपका अपना प्लेटफॉर्म है। हम ऑटोमोबाइल, शिक्षा, मनोरंजन और फाइनेंस जैसी विभिन्न श्रेणियों में विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Follow Us On Social Media

Get Latest Update On Social Media