नई दिल्ली। सिर्फ 10 मिनट… और आपका मनपसंद खाना आपके हाथ में। सुनने में यह कितना शानदार लगता है, है ना? इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स ने वाकई हमारे काम को चुटकियों में आसान बना दिया है, लेकिन उस सजा-धजा कर आए ‘फैंसी’ खाने को देखकर क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि आखिर यह बना कैसे है? यह चमक-धमक कहीं आपको धोखा तो नहीं दे रही (Food Delivery Health Risks)? आइए, इस बारे में डॉक्टर तरंग कृष्णा से कुछ जरूरी बातें जानते हैं।
न तेल का पता, न सफाई की खबर
जब आप बाहर से खाना मंगवाते हैं, तो आपको यह पता नहीं होता कि उसे पकाने में किस तरह के तेल का इस्तेमाल किया गया है। वह खाना कहां से आ रहा है, उसे कैसे तैयार किया जा रहा है और किन हालातों में पकाया जा रहा है, यह सब आपकी नजरों से छिपा होता है।
डॉक्टर के मुताबिक, कड़वा सच यह है कि 10 मिनट में आने वाला यह खाना शायद आपका पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि आपकी इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को तोड़ने के लिए है। डॉ. तरंग कहते हैं कि यह एक तरह का ‘जहर’ है जिसे आप अनजाने में रोज खा रहे हैं। यह आपके शरीर को धीरे-धीरे कमजोर बना रहा है।
ऑर्डर करने से पहले रुकें
फूड डिलीवरी ऐप्स चाहते हैं कि आप बार-बार उनसे ऑर्डर करें, इसलिए वे ‘स्वाद’ पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं, लेकिन यह स्वाद कुदरती नहीं होता। इसे आर्टिफिशियल फ्लेवर्स, कलर्स, केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स को मिलाकर तैयार किया जाता है। यानी जिसे आप लजीज खाना समझ रहे हैं, वह केमिकल्स का एक कॉम्बिनेशन हो सकता है।
इसलिए, अगली बार जब आप किसी फूड डिलीवरी ऐप को खोलें, तो एक पल के लिए रुककर यह जरूर सोचें- क्या यह आर्डर आपका पेट भरने के लिए है या फिर आपके इम्यून सिस्टम को बर्बाद करने के लिए?

